रुद्राभिषेक पूजा क्या होती है
रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने की विशेष विधि है। इसमें शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर आदि से अभिषेक किया जाता है।
पूजा के दौरान वैदिक मंत्रों का जाप होता है, जिनमें मुख्य मंत्र रुद्र सूक्त, म महामृत्युंजय मंत्र, और ॐ नमः शिवाय का जप किया जाता है।
रुद्राभिषेक पूजा का महत्व (लाभ)
रुद्राभिषेक करने से प्राप्त होने वाले प्रमुख लाभ –
🔹 मानसिक शांति मिलती है
तनाव और चिंता दूर होती है
मन स्थिर होता है
🔹 रोगों से रक्षा
अच्छा स्वास्थ्य मिलता है
नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
🔹 ग्रह दोषों का निवारण
शनि, राहु–केतु, पितृ दोष कम होते हैं
कुंडली के कष्टदायी योग शांत होते हैं
🔹 धन–व्यापार में वृद्धि
काम में आ रही बाधाएं दूर
बिज़नेस और नौकरी में तरक्की
🔹 परिवार में सौहार्द
झगड़े, कलह और गलतफहमियाँ कम
प्रेम और विश्वास बढ़ता है
रुद्राभिषेक कब करना चाहिए?
रुद्राभिषेक किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन मुख्य शुभ अवसर हैं
सावन का महीना
मासिक शिवरात्रि / महाशिवरात्रि
प्रत्येक सोमवार
जन्मदिन, विवाह-वार्षिकी
ग्रहों के कष्ट या अशांति होने पर
रुद्राभिषेक की सामग्री
जल, दूध
दही, घी, शहद
शक्कर/पंचामृत
गंगाजल
बेलपत्र
धतूरा, भांग (यदि उपलब्ध हो)
अक्षत (चावल)
पंचामृत
फल व प्रसाद
दीप, कपूर, धूप
रुद्राभिषेक करने की विधि
1. शुद्ध होकर स्नान करें
नए या स्वच्छ वस्त्र पहनें
2. पूजन स्थान तैयार करें
शिवलिंग की स्थापना
दीपक जलाएं
धूप अर्पित करें
3. संकल्प लें
अपना नाम, गोत्र, स्थान और उद्देश्य बोलें
4. अभिषेक प्रारंभ
क्रम अनुसार निम्न पदार्थ से शिवलिंग स्नान करें –
शुद्ध जल
गंगाजल
दूध
दही
घी
शहद
चीनी
पंचामृत
बेलपत्र अर्पण
5. मंत्र जाप
अभिषेक करते समय यह मंत्र बोलें –
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे.. (महामृत्युंजय मंत्र)
6. फूल और प्रसाद चढ़ाएं
7. आरती करें
रुद्राभिषेक में क्या सावधानियां रखें?
शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं
तुलसी पत्ता शिव जी को न चढ़ाएं
वस्त्र/दूध गरम न हो
तांबे के पात्र में दूध न रखें
दाईं ओर से अभिषेक न करें



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